इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने इसे अंधविश्वास और रूढ़िवादिता के खिलाफ एक साहसिक कदम बताया। उनका कहना था कि विज्ञान और शिक्षा के इस दौर में भी समाज में कर्मकांड और अंधविश्वास का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है। ऐसे में इस तरह की पहल सामाजिक जागरूकता और वैचारिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस कार्यक्रम में डॉ. संदीप सौरभ भी शामिल हुए और उन्होंने इसे समानता, तार्किक सोच और सामाजिक सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे परंपराओं को आंख मूंदकर न अपनाएं, बल्कि विवेक और समझदारी से निर्णय लें।यह पहल न केवल एक परिवार का निजी निर्णय है, बल्कि समाज में नई सोच और बदलाव की संभावनाओं को भी दर्शाती है।

