अनुकंपा के आधार पर नियुक्त नवनियुक्त लिपिक एवं परिचारियों के वेतन निर्धारण को लेकर बिहार विधानसभा में मुद्दा उठाया गया। डॉ. संदीप सौरभ ने सदन में कहा कि दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के बाद उनका जेनरेट कर नियत वेतन तय करना संवेदनशील विषय है, जिसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
डॉ. सौरभ ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य को खोया है, उनके साथ वेतन संबंधी असमानता या अस्पष्टता “क्रूर मज़ाक” के समान प्रतीत होती है। उन्होंने मांग की कि इन नवनियुक्त कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए तथा नियमित वेतनमान सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा विभाग में वर्षों से कार्यरत दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को सम्मानजनक सेवा शर्तें मिलनी चाहिए। सदन में इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट नीति लाने की मांग की गई। डॉ. संदीप सौरभ ने कहा कि यह केवल वेतन का प्रश्न नहीं, बल्कि न्याय और संवेदनशील प्रशासन का विषय है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या नीतिगत निर्णय सामने आता है।