बिहार के विद्यालयों की प्रथम व द्वितीय सावधिक परीक्षाओं से जुड़े मुद्रण एवं संबंधित कार्यों को राज्य के रजिस्टर्ड प्रेस के बजाय गुजरात की कंपनियों को दिए जाने के मुद्दे पर विधायक डॉ. संदीप सौरभ ने सवाल उठाया है। उन्होंने इस विषय को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्थानीय संस्थानों के हितों पर चर्चा की मांग की।
डॉ. सौरभ ने कहा कि बिहार में पंजीकृत प्रेस वर्षों से शैक्षणिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में बाहरी कंपनियों को कार्य आवंटित किए जाने के निर्णय के पीछे क्या कारण रहे, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि राज्य के भीतर उपलब्ध संसाधनों और संस्थानों की अनदेखी की जाती है, तो इसका प्रभाव स्थानीय रोजगार और उद्योग पर पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि निविदा प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और चयन के आधार सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की शंका दूर हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्णय नियमों के तहत लिया गया है, तो सरकार को तथ्यात्मक जानकारी सदन और जनता के सामने रखनी चाहिए। डॉ. संदीप सौरभ ने पारदर्शिता और स्थानीय हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।