विधायक डॉ. संदीप सौरभ ने सदन के भीतर और सार्वजनिक मंचों पर भारतीय जनता पार्टी की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सदन में गोरक्षा और पशु संरक्षण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर कथित रूप से बीफ़ निर्यात से जुड़े उद्योगों या कारोबारियों से चंदा लिए जाने की खबरें सामने आती रही हैं।
डॉ. सौरभ ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक विचारधारा और उसके वित्तीय स्रोतों के बीच विरोधाभास दिखाई देता है, तो उस पर पारदर्शिता आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग समय पर स्पष्टीकरण दिए गए हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। चुनावी चंदे और उद्योग जगत के संबंधों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है, जिस पर सभी दलों को स्पष्ट रुख रखना चाहिए।डॉ. संदीप सौरभ ने मांग की कि राजनीतिक फंडिंग से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बना रहे।