उन्होंने बताया कि उनकी बहू ने पटना में एक बड़े ऑपरेशन के बाद बच्चे को जन्म दिया था। घर लौटने के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे पालीगंज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 12 दिनों के इलाज के बाद अस्पताल का बिल ₹45,000 हो गया था, और भुगतान न होने की स्थिति में बच्चे को रोक लिया गया था। अत्यंत गरीब मुसहर समाज से आने वाले इस परिवार के लिए यह स्थिति बेहद कठिन थी।
जनसंवाद समाप्त होते ही तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टरों और प्रबंधन से बातचीत की गई। साथ में माले नेत्री नागो देवी और युवा साथी दानिश मलिक भी मौजूद रहे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिल माफ करने का अनुरोध किया गया, जिसे मानवीय आधार पर स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद बच्चे को सुरक्षित उसकी दादी को सौंप दिया गया।
परिवार को वापस खपुरा गाँव पहुँचाया गया, जहाँ नहर किनारे झोपड़ी में रहने वाले इस परिवार के लिए यह पल भावनात्मक था। बच्चे को देखते ही माँ की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। यह दृश्य न सिर्फ परिवार बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी राहत और संतोष का कारण बना।यह घटना दर्शाती है कि जनसंवाद केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि ज़रूरतमंदों के साथ खड़े होने का एक सशक्त माध्यम है।