क़य्यूम अंसारी जी का संघर्ष केवल शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने ज़मीनी स्तर पर लोगों को जोड़ने और समाज में आपसी विश्वास मज़बूत करने का कार्य किया। वे मानते थे कि एक सशक्त समाज वही है जहाँ धर्म, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर इंसान को इंसान के रूप में सम्मान मिले। उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता और न्याय की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए। नफ़रत के विरुद्ध एकता, अन्याय के विरुद्ध आवाज़ और विभाजन के विरुद्ध भाईचारा ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। क़य्यूम अंसारी जी का जीवन हमें निरंतर प्रेरित करता है कि हम एक न्यायपूर्ण, समान और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के लिए मिलकर आगे बढ़ें।