मनरेगा की पुनर्बहाली और उसकी जगह लाए गए ग्रामजी कानून की वापसी की मांग को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन प्रदर्शनों में मजदूरों, किसानों, ग्रामीण गरीबों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों को ग्रामीण जनता के खिलाफ बताते हुए रोजगार के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा देश का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून रहा है, जिसने करोड़ों गरीब परिवारों को न्यूनतम रोजगार और आजीविका की सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर मनरेगा को कमजोर किया और अब ग्रामजी जैसे नए कानून के जरिए इसे पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि ग्रामजी कानून के तहत काम के दिनों और मजदूरी को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से दूर हैं। मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है और बुलडोजर कार्रवाई जैसी नीतियों से गरीबों का जीवन और अधिक असुरक्षित हो गया है। उन्होंने मनरेगा की तत्काल पुनर्बहाली, ग्रामजी कानून की वापसी और ग्रामीण गरीबों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।