डॉ. संदीप सौरभ - संघर्ष की राह पर क़दम बढ़ाओ, एकता से गगन झुकाओ
- By
- Dr Sandeep Saurav
- June-29-2025
कदम मिलाकर चलो, आकाश झुकाना है" केवल एक नारा नहीं, बल्कि एकता, संघर्ष और बुलंद हौसलों का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि जब हम सभी लोग अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होकर कदम बढ़ाते हैं, तो कोई भी बाधा – चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यों न हो – हमारे रास्ते को नहीं रोक सकती। यह पंक्ति उस जज़्बे को दर्शाती है जो किसी भी सामाजिक, राजनीतिक या जनआंदोलन में तब पैदा होता है जब आम लोग असाधारण संकल्प के साथ साथ आते हैं।
यह हमें याद दिलाता है कि एकजुटता की शक्ति इतनी प्रबल होती है कि वह आसमान को भी झुका सकती है, यानी असंभव को संभव बना सकती है। इसका मतलब है — संगठित संघर्ष। यह हमें याद दिलाता है कि अलग-अलग होकर हम कमजोर होते हैं, लेकिन जब हम एक विचार, एक दिशा और एक लक्ष्य के साथ खड़े होते हैं, तब हम अजेय बन जाते हैं।
यह नारा संघर्ष की उस भावना को जन्म देता है, जो किसी भी जनांदोलन की आत्मा होती है — एक ऐसा संकल्प जो हार नहीं मानता, जो सिर झुकाने की बजाय सर ऊँचा करके अन्याय का मुकाबला करता है। कदम मिलाकर चलो, आकाश झुकाना है" उस उम्मीद की भाषा है जो हर पीड़ित, शोषित और संघर्षरत व्यक्ति के भीतर छिपी होती है। यह उन युवा कदमों की ताक़त का प्रतीक है, जो भविष्य को नया आकार देने के लिए आगे बढ़ते हैं।