डॉ. संदीप सौरभ ने विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग कोटा निर्धारित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि महिला आरक्षण के भीतर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि आरक्षण में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका लाभ सीमित समूहों तक ही सिमट सकता है।
उन्होंने विधानसभा में कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल घोषणा से नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत निर्णयों से संभव है। डॉ. संदीप सौरभ ने सरकार से आग्रह किया कि महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ ओबीसी महिलाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान तय कर शीघ्र लागू किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में व्यापक और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।